Navigation Menu

Latest Tweets

Asset Publisher



अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (मा.सं.) डॉ. अलका मित्तल ने आज विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर ओएनजीसी, डीयूबी, दिल्ली की राजभाषा गृहपत्रिका के प्रथम ई-जरनल अंक का विमोचन किया। इस अवसर पर श्री विजय प्रकाश, कार्यकारी निदेशक-प्रधान समन्वय, श्री हरीश कुमार अवल, समूह महाप्रबंधक- प्रमुख निगमित संचार एवं श्री शेखर चंद्र शुक्ला, महाप्रबंधक (मा.सं.) मौजूद रहे। साथ में श्री गगनदीप सिंह अनेजा, प्रबन्धक (नि.सं.) एवं संजय वती, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी भी उपस्थित रहे।

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (मा.सं.) डा. अल्का मित्तल ‘स्नेहधारा’ को विमोचन करते हुए
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (मा.सं.) डा. अल्का मित्तल ‘स्नेहधारा’ को विमोचन करते हुए

ओएनजीसी परिवार के सभी सदस्यों को विश्व हिन्दी दिवस की बधाई देते हुए अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (मा.सं.) डॉ अलका मित्तल मैडम ने कहा कि आज हिन्दी की गणना विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली अग्रणी भाषाओं में होती है। आज हिन्दी के पास इतने ज्यादा शब्द हैं जो गहन तकनीकी विषयों को भी अभिव्यक्त करने में समर्थ हैं। राजभाषा गृहपत्रिका “स्नेहधारा” की प्रशंसा करते हुए इसकी सफलता हेतु शुभकामनाएँ व्यक्त की, साथ ही पत्रिका में सारगर्भित लेखों का आकलन कर उनके लेखकों को बधाई दी। राजभाषा के प्रचार-प्रसार के संदर्भ में मैडम डॉ अलका मित्तल द्वारा अत्यंत बहुमूल्य सुझाव दिया गया कि विभिन्न विभागों/अनुभागों में हिन्दी की पुस्तकों का वितरण किया जाए ताकि कार्मिकों में हिन्दी में अधिक से अधिक कार्य करने का एक माहौल तैयार हो।

श्री विजय प्रकाश ने कहा कि “मुझे पूरा विश्वास है कि ‘स्नेहधारा’ पत्रिका के माध्यम से राजभाषा हिन्दी का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा और राजभाषा के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में सहयोग मिलेगा”।

श्री हरीश कुमार अवल ने कहा कि “प्रतिस्पर्धा के इस युग में हिन्दी भाषा इतनी सक्षम है कि शासन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में काम करना आसान हो गया है। साथ ही कहा कि “स्नेहधारा” पत्रिका का प्रकाशन इस दिशा में एक सार्थक प्रयास है। 

श्री शेखर चंद्र शुक्ला, महाप्रबंधक (मा.सं.) ने बताया कि मौलिक सोच और सृजनात्मक अभिव्यक्ति केवल अपनी भाषा में ही संभव है। अपनी भाषा में मौलिक लेखन से अभिव्यक्ति सरल, सहज और स्वाभाविक होती है। पत्रिकाएँ कार्मिकों को अपना कार्य हिन्दी में करने के लिए प्रेरित भी करती हैं।

पत्रिका में सभी विधाओं जैसे - तकनीकी लेख, कहानी, कविताएं एवं संस्मरण आदि को सम्मिलित किया गया है। सृजनात्मक प्रतिभाओं को एक व्यापक मंच प्रदान कर एवं अलग-अलग विषयों को समाहित कर एक उत्कृष्ट पत्रिका के प्रतिनिधित्व का प्रयास किया गया है।



Download Upload-File