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कार्बन प्रबंधन



ओएनजीसी दुनिया की एक प्रमुख ऊर्जा कंपनी होने के नाते पारि-प्रणाली के संरक्षण के माध्‍यम से संधारणीय विकास सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारियों को समझता है। इसलिए यह सतत प्रबंधन में स्वयं को अग्रणी संगठन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रयासरत है, और इसने कार्बन प्रबंधन के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से सतत विकास प्राप्त करने का लक्ष्य   निर्धारित किया है। ओएनजीसी का मानना है कि केंद्रित कार्बन प्रबंधन प्रयास पर्यावरणीय आयामों में हमारे व्यापार विशिष्ट सतत विकास के मुद्दों को कवर करने के लिए एक आदर्श मार्ग है। पर्यावरणीय संधारणीयता का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र परिचालनों से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस में कमी लाना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ऊर्जा  खपत को कम करने की दिशा में काम कर अपने कार्बन पदचिह्न को उत्‍तरोत्‍तर कम करना ही हमारा संगठनात्मक उद्देश्य है।

ओएनजीसी जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले जोखिमों से अवगत है। हमारे संगठन में एक समर्पित कार्बन प्रबंधन और संधारणीयता समूह (सीएम एंड एसजी) है, जिसके पास ओएनजीसी को संधारणीय विकास (एसडी) के क्षेत्र में अग्रणी संगठन के रूप में स्थापित करने तथा संधारणीय विकास के साथ सभी व्यावसायिक गतिविधियों में तालमेल बिठाने के लिए स्वैच्छिक रूप से कार्बन प्रबंधन कार्यनीति बनाने का विशिष्ट अधिदेश (मैंडेट) है, विशिष्‍ट रूप से जलवायु परिवर्तन जोखिमों से संबंधित मुद्दों को हल करने और कार्बन न्यूनीकरण (शमन) पहलों से उत्पन्न अवसरों की तलाश करने के लिए। प्रबंधन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह संगठन वैश्विक जलवायु परिवर्तन वार्ताओं से अद्यतित रहे और भारत की घरेलू प्रतिबद्धताओं के प्रति सजग रहे, राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय जलवायु परिवर्तन मंचों पर सक्रिय रहा है।

वैश्विक मीथेन पहल

तेल और प्राकृतिक गैस प्रणालियों से उड़न (फ्यूजिटिव) मीथेन उत्सर्जन मुख्यतः सामान्य परिचालनों और प्रणाली विघ्‍नों के कारण होता है। इन उत्सर्जनों को प्रौद्योगिकी या उपकरणों का उन्‍नयन कर और परिचालनों में सुधार लाकर अर्थक्षम ढंग से कम किया जा सकता है। वैश्विक मीथेन पहल (जीएमआई) यूएसईपीए की ओर से एक कार्रवाई उन्मुख पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक संवृद्धि को बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा का संवर्धन करने, पर्यावरण में सुधार लाने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के लिए वैश्विक स्‍तर पर उड़न मीथेन उत्‍सर्जन को कम करना है। जीएमआई सहकारी न्यूनीकरण गतिविधियों को सहायता और समर्थन प्रदान करता है जिसके परिणामस्वरूप अभिनिर्धारण, परिमाणीकरण और कमी (आईक्यूआर) के माध्यम से बाजारों में अधिक गैस पहुंचाया जाता है। अगस्त, 2007 में ओएनजीसी ने बाजार परियोजनाओं में मीथेन को लाने के लिए जीएमआई - जिसे तब संयुक्त राज्य पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के नाम से भी जाना जाता था - के साथ करार किया, और एक समर्पित आंतरिक टीम का गठन कर मीथेन उत्सर्जन का पता लगाने और उसकी माप करने वाले उपकरण की, जिसमें मीथेन उत्सर्जन अभिप्राप्‍त करने के लिए एक समर्पित आंतरिक टीम बनायी गयी है और इसने कुछ वर्षों में लगभग 16.7 एमएमएससीएम उड़न मीथेन को कम किया है। ओएनजीसी ने उड़न हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन के लिए अपने सभी उत्पादन प्रतिष्‍ठानों को मानचित्रित करने के लिए और प्रतिष्‍ठानों को रिसाव मुक्त बनाने के लिए प्रभावी योजना भी तैयार की है।