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देशीय प्रयासों के साथ स्थानीयकरण में अग्रणी होने के नाते, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ने विक्रेताओं को स्थानीय सामग्री लेने के लिए कहकर आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है । ई एंड पी क्षेत्र की आवश्यकताओं के लिए विक्रेता विकास - अत्मानिर्भर भारत के दृष्टिकोण - पर एक वेबिनार के दौरान ओएनजीसी के निदेशकों और प्रमुख कार्यपालकों ने दर्शाया कि ओएनजीसी हर स्थल पर उपकरण और औजारों के स्थानीयकरण का अनुवर्तर कर रहा है और भारतीय विक्रेताओं को उन क्षेत्रों में आने के लिए प्रेरित कर रहा है जहां वर्तमान में भारत ज्यादातर आयात पर निर्भर है।

ओएनजीसी ने ई एंड पी क्षेत्र की आवश्यकताओं के लिए विक्रेता विकास - अत्मानिर्भर भारत के दृष्टिकोण - पर एक वेबिनार का आयोजन 19 अगस्त 2020 को केपीएमजी, एक बहुराष्ट्रीय पेशेवर सेवाएं नेटवर्क,  के साथ मिलकर किया था। वेबिनार देश में ई एंड पी क्षेत्र के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के ओएनजीसी के व्यापक दृष्टिकोण का एक हिस्सा था। यह दृष्टि देश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के राष्ट्र के लक्ष्यों के अनुरूप है।

वेबिनार में निदेशक (टी एंड एफएस) श्री ओ पी सिंह, निदेशक (अभितट) श्री अनुराग शर्मा, कार्यकारी निदेशक - तकनीकी सेवाएं प्रमुख, श्री आर के सिंह, कार्यकारी निदेशक - कारपोरेट एमएम प्रमुख श्री ए पी त्रिपाठी, उद्योग के विशेषज्ञों के साथ - एमडी भारत फोर्ज श्री सुबोध टंडले, कंन्ट्री मैनेजर बेकर ह्यूजेस (बीएचजीई) श्री शशांक झा, जीएम जिंदल सॉ लिमिटेड श्री अवनीश कुमार और प्रबंध निदेशक (इंजीनियरिंग और निर्माण) पेट्रोफैक लिमिटेड श्री ई सत्यनारायणन ने भाग लिया। वेबिनार में 30 से अधिक ई एंड पी विक्रेता पारिस्थितिकी तंत्र कंपनियां, लगभग 40 वरिष्ठ उद्योग अग्रणी और वैश्विक एमएनसी और देशीय चैंपियन भी शामिल हुए।

आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए ओएनजीसी द्वारा उठाया गया कदम; भारतीय विक्रेताओं को स्थानीय सामग्री के लिए प्रोत्साहन

विक्रेता को स्थानीयकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, निदेशक (टी एंड एफएस) श्री ओ पी सिंह ने कहा, “भारतीय उद्योग में स्थानीय स्तर पर वस्तुओं को निर्मित करने की क्षमता है जो वर्तमान में आयात की जाती हैं। ओएनजीसी इस स्थानीयकरण में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी, ताकि आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण साकार हो।”

निदेशक (टी एंड एफएस) ने कहा कि “कोविड ​​की स्थिति के कारण हर रोज चुनौतियां हैं, फिर भी हम स्वदेशीकरण को तेज करने के लिए प्रधानमंत्री के स्पष्ट आह्वान का अनुसरण कर रहे हैं। हम अपने हर स्थान पर अपने उपकरण या औजारों का स्थानीयकरण कर रहे हैं। स्वदेशीकरण में गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण है और निम्न गुणवत्ता का व्यापक प्रभाव होता है”।

निदेशक (अभितट) श्री अनुराग शर्मा ने कहा कि भारत तेल और गैस का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है और समय के साथ ई एंड पी के प्रयास बढ़ते जाएंगे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ओएनजीसी स्थानीय प्रयासों के साथ स्थानीयकरण में अग्रणी है। “महारत्न ने स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमने लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल कर लिया है लेकिन हम पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। ओएपीएल, डीएसएफ, छोटे फील्ड, और राष्ट्रीय भूकंपीय कार्यक्रम जैसी विभिन्न नीतियों और उपायों को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा अपनाया गया है। अगले कुछ वर्षों में, वस्तुओं का कुल माल बाजार मूल्य बढ़ कर 11 बिलियन अमेरीकी डालर हो जाएगा।”

वेबिनार के दौरान दिए गए सुझावों को संबोधित करते हुए, निदेशक (अभितट) ने कहा, "व्यक्त की गई चिंताओं पर हमारे द्वारा ध्यान दिया जाएगा, हालांकि, हम इनमें से अधिकांश को जानते हैं। हम अपने विक्रेताओं को इस आत्मनिर्भर भारत के स्वदेशीकरण स्तरों के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। "

स्थानीयकरण और अवसरों पर ओएनजीसी की पहलों पर प्रकाश डालते हुए, कार्यकारी निदेशक - कारपोरेट एमएम प्रमुख श्री ए.पी. त्रिपाठी ने ओएनजीसी की खरीद नीति में परिवर्तन साझा  किए :

  • पीपीएलसी नीति - इस नीति के अंतर्गत, एलसी - सबसे कम तकनीकी व्यावसायिक स्वीकार्य बोलीदाता को 10 प्रतिशत की खरीद वरीयता दी जाती है।
  • एमएसएमई नीति - इसमें, एल1 + 15 प्रतिशत के मूल्य बैंड के भीतर भाग लेने वाले एमएसएमई को एल-1 मूल्य के मिलान के अधीन 25 प्रतिशत तक की आपूर्ति की जा सकती है। खरीद नीति के अनुसार, 358 मदें एमएसएमई से अनन्य खरीद के लिए आरक्षित हैं। 
  • डीएमईपी नीति - मूल्य परिवर्धन को पूरा करने के अधीन डीएमईपी को खरीदारी वरीयता प्रदान की जाती है।
  • जीईएम नीति - ओएनजीसी ने जीईएम पर उपलब्ध वस्तुओं की खरीद के लिए नीतिगत प्रावधान किए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए जीईएम पर एक ऑर्डर का कुल मूल्य 37 करोड़ रुपये है।
  • वैश्विक निविदा नीति - इस नीति के अंतर्गत, सरकार ने अधिसूचित किया है कि 200 करोड़ रुपये तक की खरीद के लिए वैश्विक निविदा जारी नहीं की जाएगी और ओएनजीसी इस नीति को लागू करेगी।
  • डीएमआई और एसपी - इस नीति के अंतर्गत, ओएनजीसी घरेलू स्तर पर निर्मित लोहे और इस्पात उत्पादों को प्राथमिकता देती है। तथापि, 13सीआर केसिंग के मामले में अपवाद की मांग की गई है।

श्री त्रिपाठी ने रेखांकित किया कि ओएनजीसी द्वारा की गई खरीद का 80 प्रतिशत स्वदेशी विक्रेताओं से हैं। स्थानीयकरण में अग्रणी होने के नाते, ओएनजीसी खरीद वरीयता नीति को लागू करने वाला पहला संगठन है। मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए, ओएनजीसी पहले से ही नए विक्रेताओं को विकास आर्डर दे रहा है।

श्री त्रिपाठी ने बताया कि ओएनजीसी कारपोरेट वेबसाइट (ongcindia.com) पर उपलब्ध पंच-वर्षीय खरीद योजना सभी के लिए सुलभ है, जो समय-समय पर अद्यतन होती रहती है। उन्होंने आगे कहा कि अधिक से अधिक विक्रेताओं को लाभान्वित करने के लिए विकास आर्डर नीति की समीक्षा की जा रही है।

“अभितट के लिए, स्थानीयकरण अधिक है, तथापी, अपतटीय में, अभी भी काफी मात्रा में आयात किया जाता है। हर वर्ष करीब 500 करोड़ रुपये का मड केमिकल खरीदा जाता है। इसे कम किया/समाप्त किया जा सकता है, यदि भारतीय विक्रेता मड रासायनिक क्षेत्र में आते हैं तो। साथ ही, 135 वस्तुए ऐसी हैं जिनके लिए कोई भारतीय विक्रेता नहीं है। एसआरएफ, जिसका भारत में वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये का है, आयात किया जाता है। मैं भारतीय विक्रेताओं से इन क्षेत्रों में आने का अनुरोध करूंगा। श्री त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि यह  “आत्मानिर्भर भारत” की दिशा में एक अच्छा कदम होगा। 

उन्होंने सभी से स्थानीय उत्पादों के लिए मुखर होने का अनुरोध किया। उनसे पूर्व, कार्यकारी निदेशक - तकनीकी सेवा प्रमुख  श्री आर के सिंह ने ई एंड पी उद्योग के प्रौद्योगिकी स्पेक्ट्रम को साझा किया।  

सेवाओं और उपकरणों के स्थानीयकरण के लिए उद्योग के रोडमैप के प्रमुख पहलुओं के बारे में बताते हुए, कंट्री मैनेजर बीएचजीई श्री शशांक झा ने साझा किया कि सऊदी अरब जैसे कुछ देश निर्माताओं को स्थानीय स्तर पर उपकरण बनाने के लिए मजबूर करते हैं। इसमें कोई मूल्य मिलान नहीं होतों है। उन क्षेत्रों में व्यावसायीकरण में मदद करना महत्वपूर्ण है जहां बहुत अधिक निवेश की आवश्यकता होती है, इसलिए उस मॉडल पर भारत में विचार किया जाना चाहिए। एक और मॉडल जो पूरी तरह से समाप्त करने वाला (सीकेडी) है, वह विनिर्मित हिस्सों को आयात करना और उन्हें भारत में असेम्बल करना है। एपीआई प्रमाणीकरण पर विचार करना एक और मुद्दा है। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी भागीदारों के साथ संबंध स्थापित करके, भेल जैसे वाणिज्यिक संगठनों को पेचीदगियों के प्रबंधन में लगाकर स्थानीय स्तर पर मूल्य श्रृंखला का निर्माण करना है। ये मॉडल संभवतः भारत में अगले दो-तीन वर्षों में कार्य कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ''भारत में विनिर्माता स्मार्ट है, उन्हें केवल ओएनजीसी जैसी कंपनियों से कुछ समर्थन और सहयोग की जरूरत है।''

मैनेजिंग डायरेक्टर (इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन) पेट्रोफैक लिमिटेड श्री ई. सत्यनारायणन ने कहा कि पेट्रोफेक में भारतीय कंपाउंड की खरीद 2016 में छह प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 11 प्रतिशत हो गई है। “स्थानीय विक्रेता के लिए एक अच्छा अवसर मौजूद है यदि ओएनजीसी जैसे खरीदारों द्वारा कुछ समर्थन और छूट दी जाती है तो। आत्मनिर्भर भारत विक्रेताओं के दिलों के करीब है। ओएनजीसी के मीटरेज-रेट संविदाओं के बजाय निष्पादन-आधारित अनुबंधों को करने पर विचार कर सकता है।" 

वेबिनार में ई एंड पी क्षेत्र में स्थानीयकरण की क्षमता और ओएनजीसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ने के बारे में एक परिपूर्ण और गहन चर्चा हुई।