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production



crude oil producer in India

ओएनजीसी, जो भारत में अग्रणी अपस्‍ट्रीम पेट्रोलियम कंपनियों में से एक है, द्वारा उत्‍पादन के मोर्चे पर किए गए निरंतर प्रयासों से सार्थक परिणाम प्राप्‍त हुए हैं। इस वर्ष के दौरान ओएनजीसी द्वारा प्रचालित फील्‍डों से एकल घरेलू उत्‍पादन 22.25 एमएमटी रहा है जिससे भारत में कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्‍पादक के रूप में रहा । वित्‍तीय वर्ष 2017-18 के दौरान, कच्‍चे तेल के उत्‍पादन में गिरावट की प्रवृत्ति में परिवर्तन हुआ है – अभितट कच्‍चा तेल उत्‍पादन पिछले वर्ष 2016 में 5.83 एमएमटी की तुलना में वित्‍तीय वर्ष 2017 में बढ़कर 5.97 एमएमटी हो गया है। चालू वित्‍तीय वर्ष के दौरान भी इस वृद्धि के जारी रहने की आशा है।

कंपनी ने घरेलू देश के उत्‍पादन की दृष्टि से एक मजबूत वर्ष भी दर्ज किया है। इस उत्‍पादन में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है – वित्‍तीय वर्ष 2016 में 21.18 बीसीएम से वित्‍तीय वर्ष 2017 के दौरान 22.09 बीसीएम हो गई है, पिछले चार वर्षों में यह पहली वृद्धि है। वित्‍तीय वर्ष 2016 से गैस उत्‍पादन में अभितट फील्‍डों में 9%   तक और अपतट फील्‍डों  3% तक वृद्धि हो गई है। भारत के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में अपना नेतृत्‍व कायम रखने और देश को हाइड्रोकार्बन सुरक्षा उपलब्‍ध कराने हेतु ओएनजीसी के लिए 4 से 5% की अपनी सुदृढ़ उत्‍पादन वृद्धि दर बनाए रखना आवश्‍यक है। 4 से 5%  वृद्धि दर के साथ ओएनजीसी यह आकांक्षा करता है कि वह 2030 तक भारत की हाइड्रोकार्बन खपत में अपने हिस्‍से में वर्तमान 22 से बढ़ाकर 27% की वृद्धि करेगा।

उत्‍पादन और प्रसंस्करण

crude oil company

पिछले कुछ सप्‍ताहों में हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को निर्देश जारी किए हैं कि वे क्षेत्र-वार उत्‍पादन की दैनिक रिपोर्ट और आवधिक आरक्षित भंडार प्रबंधन रिपोर्टें प्रस्‍तुत करें। हाइड्रोकार्बन में वृद्धि करने के प्रयासों में ओएनजीसी सतत प्रयास करता है कि वह उच्‍च परिशुद्धता और आरक्षित भंडार की विशेषता वर्णन में वास्‍तविक समय पर आंकड़ा प्राप्ति के लिए अति आधुनिक प्रौद्योगिकी शामिल करे। हाल ही में किया गया प्रयास कूप डब्‍ल्‍यूओ-24#3 में वेधन स्‍टेन परीक्षण प्रचालनों के दौरान वायरलेस सरफेस रीड आउट प्रौद्योगिकी की तैनाती करना है।

उत्पादन प्रदर्शन

Particulars FY’21
Crude Oil–ONGC (MMT) 19.172
Crude Oil–JVs (MMT) 2.260
Condensate (MMT) 1.102
Total Crude Oil (MMT) 22.533
Gas – ONGC (BCM) 22.096
Gas – JVs (BCM) 0.720
Total Gas (BCM) 22.816
Value Added Products (KT) 3120

आरक्षित भंडार प्रबंधन

आरक्षित भंडार प्रबंधन अन्‍वेषण के साथ आरंभ होता है जिसके परिणामस्‍वरूप खोज की जाती है । इसके पश्‍चात आरक्षित भंडार का मूल्‍यांकन, प्राथमिक और द्वितीयक साधनों के अंतर्गत फील्‍ड का विकास, आईओआर तथा ईओआर होता है तथा अंतत: परित्‍याग किया जाता है।

परिपक्‍व फील्‍डों से तेल प्रतिप्राप्ति को बढ़ावा देने के कार्य के लिए साहसिक निवेश निर्णय और नई प्रौद्योगिकियाँ अपनाने की आवश्‍यकता होती है । क्‍लासिकल और नई प्रौद्योगिकियों के विवेकपूर्ण मिश्रण ने परिपक्‍व अपतट आरक्षित भंडारों के लिए नए जीवन के अवसर सृजित कर दिए हैं । परिपक्‍व फील्‍ड विकास की पद्धतियों को दो प्रमुख समूहों, सतही/ कूप अभियांत्रिकी और उप-सतही/आरक्षित भंडार अभियांत्रिकी में विभाजित किया जा सकता है। रिग लागत में वृद्धि होने के साथ परंपरागत वेधन, उत्‍पादन/जल अंत:क्षेपण (वाटर इंजेक्‍शन) के लिए अपेक्षाकृत बड़े आरक्षित भंडार सेक्‍शन के विगोपन और डेनेज क्षेत्र को बढ़ाने की प्रक्रिया तथा कूप स्‍पेसिंग कम करने की प्रक्रिया द्वारा व्‍यवहार्य रूप से समाप्‍त कर दिया गया है।

10,000 पीएसआई से अधिक उप-सतही दबाव और 3500 फारेनहाइट से अधिक तापमान के साथ भारत में तेल फील्‍डों को एचपी-एचटी आरक्षित भंडारों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ओएनजीसी ने केजी, कावेरी, पश्चिमी अपतट बेसिन और असम एवं अराकान फोर्ड बेल्‍ट में एचपी-एचटी/ टाइट/ गहन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, जहाँ अपेक्षाकृत अधिक गहरे क्षेत्रों के लिए अन्‍वेषण के दौरान इस प्रकार के वातावरण का सामना करना किया गया है । ये क्षेत्र वेधन और परीक्षण के लिए एक अन्‍वेषण चुनौती रहे हैं ।

परिवहन

जितनी ओएनजीसी, आज सबसे बड़े तेल उत्‍पादक के रूप में व्‍यापक रूप से जानी जाती है, उतना ही कम यह तथ्‍य माना जाता है कि ओएनजीसी, स्‍वतंत्र भारत में गैस विपणन में अग्रणी थी । हजीरा-बीजापुर-जगदीशपुर (एचबीजे) पाइपलाइन को छोड़कर, गुजरात, महाराष्‍ट्र, असम, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्‍यों में क्षेत्रीय गैस पाइपलाइन नेटवर्क और ग्राहकों के साथ गैस बिक्री संविदा, ओएनजीसी द्वारा किए गए थे। तथापि, गैस विपणन भारत सरकार सरकार के निर्देश पर मई, 92 में ओएनजीसी द्वारा गेल को अंतरित कर दिया गया था।

वैश्विक अपतट उत्‍पादन परिद़श्‍य में एक बड़ी भूमिका की तलाश करते हुए, ओएनजीसी अंतरराष्‍ट्रीय हाइड्रोकार्बन पाइपलाइन परियोजनाओं में भाग लेना चाहता है। कंपनी, जिसका, अपतट आर्कटिक में तेल और गैस प्रचालनों के लिए रूस के रोसनेफ्ट के साथ एक समझौता है, अब रूस और मध्‍य एशिया से भारत में हाइड्रोकार्बन के सीधे परिवहन के अवसर खोजना चाहता है।

सरकार के स्‍वामित्‍व वाले ओएनजीसी के पास एक दर्जन से अधिक प्राकृतिक गैस की खोजें हैं, जिन्‍हें वह चरणों में उत्‍पादन में लाने की योजना बना रहा है। अपतट से गैस लाई जानी है, जहां से इसे मौजूदा गैस परिवहनकर्ताओं के जरिए उपयोगकर्ताओं तक लाया जाना है।